Uploaded August 2026 | Updated September 2026, 3 weeks ago
भारतीय सिनेमा में कुछ फिल्मकार ऐसे होते हैं, जिनका सिनेमा पर्दे पर दिखाई देने वाली कहानी से कहीं आगे जाकर कला, संगीत, साहित्य और संस्कृति से एक गहरा संवाद स्थापित करता है। मुज़फ़्फ़र अली ऐसे ही संवेदनशील और बहुआयामी फिल्मकार हैं, जिनकी रचनात्मक दृष्टि ने भारतीय सिनेमा को एक अलग पहचान दी।
‘रागनीति’ के इस विशेष पॉडकास्ट में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के मीडिया विभाग के प्रमुख अनुराग पुनेठा और प्रख्यात फिल्मकार मुज़फ़्फ़र अली के बीच संवाद का यह तीसरा और अंतिम भाग है। तीन भागों की इस विशेष श्रृंखला के तीसरे भाग में मुज़फ़्फ़र अली के सिनेमा से आगे उनकी कला-दृष्टि, संगीत, साहित्य, संस्कृति और रचनात्मक सोच से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा जारी है। उनके अनुभवों और विचारों के माध्यम से यह जानने का अवसर मिलता है कि एक फिल्मकार अपने आसपास की संस्कृति, समाज और मानवीय संवेदनाओं को अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति में किस तरह शामिल करता है। मुज़फ़्फ़र अली की कला यात्रा केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रही। उनके लिए सिनेमा, संगीत, कविता, चित्रकला और संस्कृति एक-दूसरे से जुड़े हुए अनुभव हैं। यही व्यापक दृष्टि उनके व्यक्तित्व और रचनात्मक संसार को विशिष्ट बनाती है। ‘गमन’ और ‘उमराव जान’ जैसी कालजयी फिल्मों के पीछे की संवेदनशील रचनात्मक दृष्टि और एक कलाकार के रूप में मुज़फ़्फ़र अली की सोच को करीब से समझने के लिए देखिए ‘रागनीति’ का यह विशेष पॉडकास्ट - भाग 3।
वीडियो को पूरा देखें, Like करें, Share करें और IGNCA के आधिकारिक चैनल को Subscribe करना न भूलें।
📩 अपने सुझाव और जानकारी हमें भेजें: sanskriti.ignca@gmail.com
Anchor - अनुराग पुनेठा
Guest - 'पद्म श्री' मुज़फ़्फ़र अली, प्रसिद्ध फ़िल्म निर्देशक
Sansad Television is the Parliamentary channel of India. It was created in 2021 by merging Lok Sabha Television and Rajya Sabha Television.
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‘रागनीति’ के इस विशेष पॉडकास्ट में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के मीडिया विभाग के प्रमुख अनुराग पुनेठा और प्रख्यात फिल्मकार मुज़फ़्फ़र अली के बीच संवाद का यह तीसरा और अंतिम भाग है। तीन भागों की इस विशेष श्रृंखला के तीसरे भाग में मुज़फ़्फ़र अली के सिनेमा से आगे उनकी कला-दृष्टि, संगीत, साहित्य, संस्कृति और रचनात्मक सोच से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा जारी है। उनके अनुभवों और विचारों के माध्यम से यह जानने का अवसर मिलता है कि एक फिल्मकार अपने आसपास की संस्कृति, समाज और मानवीय संवेदनाओं को अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति में किस तरह शामिल करता है। मुज़फ़्फ़र अली की कला यात्रा केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रही। उनके लिए सिनेमा, संगीत, कविता, चित्रकला और संस्कृति एक-दूसरे से जुड़े हुए अनुभव हैं। यही व्यापक दृष्टि उनके व्यक्तित्व और रचनात्मक संसार को विशिष्ट बनाती है। ‘गमन’ और ‘उमराव जान’ जैसी कालजयी फिल्मों के पीछे की संवेदनशील रचनात्मक दृष्टि और एक कलाकार के रूप में मुज़फ़्फ़र अली की सोच को करीब से समझने के लिए देखिए ‘रागनीति’ का यह विशेष पॉडकास्ट - भाग 3।
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